इससे आरंभ करेंपराशक्ति (The Power Unknown to God)
हमारी परंपरा की पहली पुस्तक, हर दीक्षा से पहले पढ़ने योग्य। स्वामी सहजानंद के इस प्रश्न से जन्मी: “क्या ईश्वर की कोई विशेष वर्णमाला है?” यह दिखाती है कि कुंडलिनी किस प्रकार एक सार्वभौमिक शारीरिक भाषा, क्रियाओं, के माध्यम से आत्मा को शुद्ध करने के लिए स्वयं को अभिव्यक्त करती है। बीस से अधिक भाषाओं में अनूदित।








